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“जशने ए आजादी” की 69वी सालगिरह पर विशेष

“जशने ए आजादी” की 69वी सालगिरह पर भारत देश के हर नागरीक को ढ़ेरो बधाईयां..
15 अगस्त, 1947 को भारत ने अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आज़ादी का पहला सूरज देखा। इतिहास के कुछ ऐसे पन्ने होते हैं जिन्हें आने वाली पीढि़यां बेहद गर्व और उत्सुकता के साथ पलटती हैं। परिवर्तन का यह दौर लंबे संघर्ष, त्याग और तपस्या से ही संभव हो पाया है।

"जशने ए आजादी" की 69वी सालगिरह पर विशेष
“जशने ए आजादी” की 69वी सालगिरह पर विशेष 2015

(सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मे है,देखना है जोर कितना बाजु ए कातिल मे है)
सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के यज्ञ का आरम्भ किया महर्षि दयानन्द सरस्वती ने और इस यज्ञ को पहली आहुति दी मंगल पांडे ने। देखते ही देखते यह यज्ञ चारों ओर फैल गया।
"जशने ए आजादी" की 69वी सालगिरह पर विशेष

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्यां टोपे और नाना राव जैसे योद्धाओं ने इस स्वतंत्रता के यज्ञ में अपने रक्त की आहुति दी। दूसरे चरण में ‘सरफरोशी की तमन्ना’ लिए रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक, चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव आदि देश के लिए शहीद हो गए। तिलक ने ‘स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का उदघोष किया व सुभाष चन्द्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ का मँत्र दिया।
अहिंसा और असहयोग का अस्त्र लेकर महात्मा गाँधी और गुलामी की बेड़ियां तोड़ने को तत्पर लौह पुरूष सरदार पटेल ने अपने प्रयास तेज कर दिए। 90 वर्षो की लम्बी संर्घष यात्रा के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता देवी का वरदान मिल सका।
"जशने ए आजादी" की 69वी सालगिरह पर विशेष

15 अगस्त भारत का स्वतंत्रता दिवस है। हमें आजादी एक लम्बे संर्घष और हजारों-लाखों लोगों के बलिदान के पश्चात ही भारत आजाद हो पाया था।
देश पर मर-मिटने वाले हजारों शहीदो में से कुछ के संस्मरण इस अँक में प्रकाशित किए जा रहे हैं।

"जशने ए आजादी" की 69वी सालगिरह पर विशेष

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