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मध्यप्रदेश 1,657 अध्यापकों की नौकरी खतरे में : हड़ताल को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया है

मध्यप्रदेश: हाईकोर्ट और सरकार के आदेशों की अवहेलना कर हड़ताल कर रहे जिले के 1,657 अध्यापकों को सेवा से पृथक करने के लिये कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। कलेक्टर डॉ। संजय गोयल के निर्देश पर यह नोटिस जारी किए गए हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शुक्रवार को अध्यापकों की हड़ताल खत्म हो गई। हड़ताल के 10वें दिन शुक्रवार को संयुक्त मोर्चा ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा की।

मध्यप्रदेश 1,657 अध्यापकों की नौकरी खतरे में : हड़ताल को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया है
मध्यप्रदेश 1,657 अध्यापकों की नौकरी खतरे में : हड़ताल को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया है

शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि शनिवार को जो अध्यापक ड्यूटी पर नहीं लौटेंगे उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। आंदोलन में जिले के 1300 अध्यापक शामिल थे। संयुक्त मोर्चा के संयोजक नितिन पाटील ने बताया आंदोलन को आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाई। सभी की सहमति से आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया। ड्यूटी पर लौटने के बाद मांगों के समर्थन में अध्यापक स्कूलों में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे।

आज से अध्यापक ड्यूटी पर नहीं लौटे तो नौकरी जाएगी
अध्यापक एवं संविदा शाला शिक्षकों की हड़ताल को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक घोषित किया है। हाईकोर्ट ने हड़ताली अध्यापकों को तत्काल काम पर लौटने के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने भी शैक्षणिक व्यवस्था एवं छात्रों के हित को ध्यान में रखकर इस हड़ताल को गैर कानूनी घोषित किया है।

कोर्ट के आदेश के बावजूद अध्यापकों के काम पर नहीं लौटने पर कलेक्टर डॉ। संजय गोयल ने सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने हड़ताली अध्यापकों एवं संविदा शाला शिक्षकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिये वैकल्पिक इंतजाम करने के लिये भी जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष शर्मा ने बताया कि शासन आदेशों के विपरीत निरंतर हड़ताल पर रह रहे 1,657 अध्यापकों को सेवा से पृथक करने के लिये संबंधित संकुल प्राचार्यों के माध्यम से कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि गत 13 सितम्बर से ये अध्यापक एवं संविदा शाला शिक्षक हड़ताल पर हैं, इससे बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

प्रदेश भर में विरोध, लालघाटी में प्रदर्शन, व्हीआईपी रोड में हंगामा 24 सौ अध्यापक गिरफ्तार
भोपाल, देशबन्धु। वेतन पुनर्निर्धारण और संविलियन की मांग को लेकर प्रदर्शन करने हजारों की संख्या में अध्यापकों शुक्रवार को भोपाल पहुंच गए। कई अध्यापकों की बसें औबेदुल्लागंज और लालघाटी के पास रोक दी गईं। इसके बावजूद अध्यापक टोलियां बनाकर राजधानी की सड़कों पर उतर आए। आजाद अध्यापक संघ के तत्वावधान में आयोजित महारैली में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में अध्यापक जैसे ही सुबह छुपते-छुपाते भोपाल पहुंचे, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, लालघाटी से करीब 1800, जबकि रेलवे स्टेशन से 600 अध्यापक गिरफ्तार कर लिए गए। जबकि 1500 से ज्यादा अध्यापक अभी भी राजधानी की सड़कों पर हैं। गिरफ्तार अध्यापकों को भोपाल की केंद्रीय व जिला जेल ले लाया गया, पर शिक्षकों ने जेल परिसर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया। लालघाटी चौराहे के पास जब कलेक्टर ने अध्यापकों से बातचीत करने की बात की, तो पहले दस अध्यापक उनके पास आए। जब तक बात आगे बढ़ती देखते ही देखते 100 से 200 शिक्षकों ने कलेक्टर को घेर लिया। उन्होंने जिला प्रशासन व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भोपाल कलेक्टर निशांत बरवड़े और पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे अध्यापकों को सड़क पर समझाया जब शिक्षक नहीं माने तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
114 अध्यापक निलंबित : हड़ताल में शामिल राजधानी के करीब 114 शिक्षकों को निलंबित किया गया है। शिक्षक गुरुवार को स्कूलों में गैरहाजिर थे। डीईओ के प्रस्ताव पर यह कार्यवाही की गई है।
प्रदेशभर में हो रही गिरफ्तारी : रतलाम : सरकार के आदेश के बाद प्रदेशभर मे निलंबन की गाज अध्यापकों पर गिरने लगी है। मंदसौर, नीमच और जावरा के 729 अध्यापकों के निलंबन की तैयारी शुरू हो गई। यदि अध्यापक हड़ताल खत्म कर काम पर नहीं लौटे तो स्कूल शिक्षा विभाग उन्हें निलंबित करने का फैसला कभी भी ले सकता है। सीहोर जिले में पुलिस ने 1000 से अधिक अध्यापकों को गिरफ्तार कर लिया। ये अध्यापक हाथ में तिरंगा लेकर भोपाल रैली में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने यह कार्रवाई धारा 151 के तहत की। गिरफ्तार टीचर्स को पुलिस में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा गया है।होशंगाबाद में 100 से अधिक अध्यापकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन सभी को पुलिस लाइन में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा गया है।
आप उतरी समर्थन में : आम आदमी पार्टी की भोपाल इकाई प्रदर्शनकारी अध्यापकों के समर्थन में उतर आई। आप के मप्र सचिव अक्षय हुका, अमित भटनागर, दुष्यंत दांगी, मनोज पाल, राज मिश्रा व अन्य पदाधिकारी लालघाटी पहुंच गए। उन्होंने शिक्षकों के साथ हो रहे अन्याय को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
गिरफ्तारी के बाद दूर ले जाकर छोड़ दिया

राजधानी में प्रदर्शन करने वाले अध्यापकों की संख्या ज्यादा है, पुलिस जिन अध्यापकों को गिरफ्तार कर बस में बैठाकर ले जा रही थी, वह उन्हें कुछ दूरी पर बस से उतार देती। इसके बाद ये अध्यापक वापस लालघाटी पहुंचकर प्रदर्शन करने लगते। ये नजारा कई बार देखने को मिला। अध्यापकों ने शुक्रवार को लालघाटी से मुख्यमंत्री निवास तक रैली का आह्वान किया था। गुरुवार को अपनी गिरफ्तारी से पहले मोर्चे के भरत पटेल ने ऐलान किया था कि रैली में प्रदेशभर से करीब 50 हजार अध्यापक शामिल होंगे। इसे देखते हुए लालघाटी पर सुबह से ही पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इससे पहले गुरुवार को नगरीय निकाय और पंचायतों के अंतर्गत संचालित हो रहे स्कूलों के अध्यापकों और विभाग के अफसरों के बीच बातचीत बेनतीजा रही। बैठक में तब नाटकीय मोड़ आ गया, जब आजाद अध्यापक संघ के नेता किसी नतीजे पर पहुंचे बिना उठ गए। अध्यापक बैठक से बाहर जाने लगे, तो उनमें से 17 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर भ्रामक प्रचार और उकसाने वाले भाषण देने के लिए प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर जेल भेज दिया गया। जबलपुर हाईकोर्ट पहले ही अध्यापकों की हड़ताल को अवैधानिक घोषित कर चुका है।
संवाद के लिए द्वार खुले हैं : शिवराज
भोपाल, देशबन्धु। मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय और पंचायतों के अधीन कार्यरत अध्यापकों के शिक्षा विभाग में संविलियन सहित विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संवाद के लिए हमेशा द्वार खुले हैं, मगर ‘मांगें अभी पूरा करोÓ यह रवैया ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री चौहान ने संवाददाताओं से कहा है कि उनकी सरकार सदैव शिक्षकों के साथ रही है, किसी की कोई मांग हो उसे पूरा करने में समय लगता है। प्रशासन ने अध्यापकों से आग्रह किया था कि वे अपने आंदोलन को अभी न करें। यह ऐसी मांग है जिसमें करोड़ों रुपये लगना है, इस पर वित्त विभाग और बाकी सभी से बात करना पड़ती है। इसमें समय लगता है। इतना ही नहीं एक तरफ सूखे का संकट है और अन्य परेशानियां भी हैं।

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