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Narendra Modi Speech – छात्रो के साथ प्रधानमंत्री की परीक्षा पर बातचीत

Narendra Modi Speech
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प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi Speech में आज परीक्षा संबंधी विषयों पर छात्रों के साथ एक ‘टाउन हॉल में’ सत्र में बातचीत की। उन्होंने यहां तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों के प्रश्नों के जवाब दिये।

छात्र और माध्यम

विभिन्न टेलिवीजन समाचार चैनलों, नरेन्द्र मोदी मोबाइल एप और माय-गव प्लेटफार्म के जरिये उनसे सवाल पूछे।

संवाद

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे छात्रों, उनके माता-पिता और उनके परिवार का मित्र होने के नाते ‘टाउन हॉल’ सत्र में आए हैं। उन्होंने कहा कि वे विभिन्न मंचों के जरिये देशभर के 10 करोड़ लोगों से बातचीत कर रहे हैं।
आप सभी भी अपने अंदर के छात्र को जीवित रखें।
उन्होंने अपने अध्यापकों को याद करते हुए कहा कि उनके अध्यापकों ने उनमें ऐसे मूल्यों का निरूपण किया, जिससे उनके भीतर का छात्र आज भी जीवित है।

2 घंटे का आयोजन

प्रधानमंत्री ने कई तरह के सवालों के जवाब दिए, जिनमें घबराहट, चिंता, एकाग्रता, दबाव, मातापिता की आकांक्षा और अध्यापकों की भूमिका जैसे प्रश्न शामिल थे।

उन्होंने आत्मविश्वास के महत्व को रेखांकित करने तथा परीक्षा के दबाव और चिंता के मद्देनजर स्वामी विवेकानंद का उदाहरण दिया।

स्नोबोर्डर मार्क मैकमॉरिस

उन्होंने कनाडा के स्नोबोर्डर मार्क मैकमॉरिस का उदाहरण देते हुए कहा कि 11 महीने पूर्व उन्हें घातक चोट लगी थी और उनका जीवन खतरे में था, शीतकालीन ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता है।

सचिन तेंदुलकर

एकाग्रता के विषय में महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर खेलते समय वे केवल उसी गेंद पर विचार करते थे, जो सामने होती थी।
पिछली और अगली गेंदों के बारे में नहीं सोचते थे। योग से एकाग्रता में सुधार होता है।

प्रतिस्पर्धा

प्रधानमंत्री ने ‘प्रतिस्पर्धा’ (दूसरों के साथ स्पर्धा) के बजाय ‘अनुस्पर्धा’ (अपने आप से स्पर्धा) के महत्व पर प्रकाश डाला।

माता-पिता

माता-पिता बच्चों के लिए कुर्बानी देते हैं। प्रधानमंत्री ने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों की उपलब्धियों को सामाजिक प्रतिष्ठा का मुद्दा न बनाएं।

Narendra Modi Speech में कहा कि बच्चे के पास कोई न कोई अनोखी प्रतिभा होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा

आईक्यू (बौद्धिक कौशल) और ईक्यू (भावनात्मक कौशल), दोनों का छात्र जीवन में बहुत महत्व होता है।

समय के समायोजन

प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए पूरे साल की कोई समय सारणी या कोई टाइम-टेबल व्यवहारिक नहीं होता। आवश्यकता के अनुसार समय का पूरा उपयोग किया जाए।

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