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46वां भारतीय श्रम सम्‍मेलन शुरू

प्रधानमंत्री ने आम सहमति से कानूनों में सुधार लाने के प्रयास में त्रिपक्षीय सहयोग पर जोर दिया है।

46वां भारतीय श्रम सम्‍मेलन शुरू
46वां भारतीय श्रम सम्‍मेलन शुरू

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी आज नई दिल्‍ली में 46वें भारतीय श्रम सम्‍मेलन (आईएलसी) का उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने नेशनल करियर सर्विस (एमएससी) पोर्टल को समर्पित करने के साथ ईएसआईसी के सुधार की पहल- ईएसआईसी 2.0 का शुभारंभ किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कर्मचारी और नियोक्‍ता के बीच एक परिवार की तरह संबंध विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्‍होंने ने कहा कि इससे न केवल देश की अर्थव्‍यवस्‍था मजबूत होगी, बल्कि उद्यमियों और कामगारों, दोनों की खुशहाली भी सुनिश्चित होगी।

भारतीय श्रम सम्‍मेलन को भारतीय श्रमिक संसद के नाम से पुकारते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास त्रिपक्षीय परामर्शों से संबंधित लगभग 75 साल का अनुभव है और इसने परामर्श और आम सहमति के माध्‍यम से बदलाव की दिशा में कई कदम उठाए हैं। उन्‍होंने कहा कि बदलाव एक सशक्‍त प्रणाली का लक्षण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी उद्योग और उद्योगपति के कल्‍याण, राष्‍ट्र और सरकार के कल्‍याण और श्रमिकों तथा श्रमिक संघों के कल्‍याण को विभाजित करने वाली रेखा काफी बारीक है और इसे सावधानीपूर्वक देखना जरूरी है। उन्‍होंने उद्योगपतियों को सुझाव दिया कि वे युवाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान करके स्किल इंडिया में योगदान करें और नवीन खोज तथा खोजकर्ता को बढ़ावा दें। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘श्रमिक के सम्‍मान’ की दिशा में जागरूकता पैदा करना भारतीय समाज के लिए अनिवार्य है।

इस अवसर पर केंद्रीय वित्‍त मंत्री और सम्‍म‍ानित अतिथि श्री अरूण जेटली ने कहा कि भारत के लिए मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्‍य से उत्‍पन्‍न अवसरों से लाभ उठाना जरूरी है। इससे पहले श्रम और रोजगार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री बंडारू दत्‍तात्रेय ने कहा कि कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए राष्‍ट्रीय नीति तैयार करने में श्रमिक के महत्‍व को रेखांकित करने के लिए यह सम्‍मेलन एक सही मंच है। उन्‍होंने सम्‍मेलन में बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान अनेक महत्‍वपूर्ण पहलों को लागू किया गया है।

भारतीय श्रम सम्‍मेलन श्रम और रोजगार मंत्रालय में एक अपीलीय स्‍तर की त्रिपक्षीय परामर्श समिति है, जो देश के कामगारों से संबंधित मुद्दे पर सरकार को सलाह देती है। सभी बारह केंद्रीय श्रमिक संघ संगठनों, सेंट्रल आर्गेनाइजेशंस ऑफ एम्‍प्‍लायर्स, सभी राज्‍य सरकार और केंद्रशासित प्रदेश तथा एजेंडे के विषय से संबंधित केंद्रीय मंत्रालय/विभाग भारतीय श्रम संगठन के सदस्‍य हैं।

प्रत्‍येक समूह के लिए सीटों की समान संख्‍या आवंटित करके नियोक्‍ताओं और कामगारों के समूहों के बीच प्रतिनिधियों की संख्‍या में संतुलन रखा जाता है। 17-18 सितंबर, 1982 में आयोजित राष्‍ट्रीय श्रम सम्‍मेलन द्वारा दिये गये सुझावों के अनुसार केवल ऐसे श्रमिक संघ संगठनों को भारतीय श्रम सम्‍मेलन में प्रतिनिधित्‍व दिया जाता है, जिनके पास चार राज्‍यों में पाँच लाख से अधिक सदस्‍य हैं तथा चार उद्योगों को इसमें प्रतिनिधित्‍व दिया जाता है। भारतीय श्रम सम्‍मेलन में प्रतिनिधित्‍व करने वाले केंद्रीय श्रमिक संघ संगठनों में शामिल हैं – 1) भारतीय मजदूर संघ, 2) इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, 3) आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, 4) हिंद मजदूर सभा, 5) सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस, 6) आल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यनियन सेंटर, 7) ट्रेड यूनियन कोआर्डीनेशन सेंटर, 8) सेल्‍फ एम्‍प्‍लायड वीमेंस एशोसिएशन, 9) आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन, 10) लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन, 11) यूनाइटेड ट्रेड्स यूनियन कांग्रेस, 12) नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (धनबाद)। भारतीय श्रम सम्‍मेलन में प्रतिनिधित्‍व करने वाले नियोक्‍ताओं के संगठनों में शामिल हैं – कौंसिल ऑफ इंडियन एम्‍प्‍लायर्स {(स्‍टैंडिग कान्‍फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज (स्‍कोप), एम्‍प्‍लायर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईएफआई) और ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ एम्‍प्‍लायर्स (एआईओई)}, ऑल इंडिया मेन्‍यूफेक्‍चरर्स आर्गेनाइजेशन (एआईएमओ), लघु उद्योग भारती (एलयूबी), कन्‍फेडरेशन ऑफ इंडिया इंडस्‍ट्री (सीआईआई), फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्‍बर ऑफ कामर्स एंड इंडस्‍ट्री (एफआईसीसीआई) और द एसोसिएटेड चेम्‍बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्‍ट्री ऑफ इंडिया (एएसएसओसीएचएएम)। विभिन्‍न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्‍य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों को प्रतिनिधित्‍व प्रदान करने के लिए सरकारी सीटें निर्धारित की जाती हैं।

व्‍यावहारिक रूप से और सामाजिक साझेदारों के साथ निरंतर संवाद कायम रखने के लिए इस अपीलीय निकाय की बैठकें वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है तथा श्रम से संबंधित मुद्दे पर चर्चा की जाती है।

भारतीय श्रम सम्‍मेलन की पहली बैठक (तब इसे त्रिपक्षीय राष्‍ट्रीय श्रम सम्‍मेलन कहा जाता था) पहली बैठक 1942 में आयोजित हुई थी और अब तक कुल 45 सत्र आयोजित हुए हैं। भारतीय श्रम सम्‍मेलन का 45वां सत्र 17-18 मई, 2013 को आयोजित हुआ था।

स्‍थायी श्रम समिति (एसएलसी) एक त्रिपक्षीय निकाय है जिसने 10 जुलाई, 2015 को अपने 47वें सत्र में विचार विमर्श करके इस सम्‍मेलन में चर्चा के लिए 5 एजेंडे को अंतिम रूप दिया था।

श्रम और रोजगार मंत्रालय नियोजनालयों के नेटवर्क में प्रक्रियाओं में सुधार करके नेशनल करियर सर्विस प्रोजेक्‍ट को कार्यान्वित करता है।

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