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बस्‍तर का वैलेंटाइन : भरे बाजार में युवा करते हैं प्‍यार का इजहार

बस्‍तर का वैलेंटाइन : भरे बाजार में युवा करते हैं प्‍यार का इजहार

शहरों में प्यार के इजहार के लिए भले ही युवाओं को वेलेंटाइन डे का इंतजार रहता है, लेकिन अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत के लिए मशहूर बस्तर में प्यार के इजहार का तरीका ही अलग है। शहरी युवा जहां रेस्टोरेंट्स, गार्डन और एकांत ढूंढकर प्यार का इजहार करते हैं वहीं, छत्‍तीसगढ़ में बस्तर के युवक-युवतियां प्यार का इजहार भरे बाजार में करते हैं।

जी हां, बस्तर के ग्रामीण युवक-युवतियों का प्यार हाट-बाजारों में ही पनपता है। यहां वे एक-दूसरे को देखते ही नहीं बल्कि उपहार देकर दोस्ती के बाद दांपत्य जीवन शुरू करते हैं। आज भी आदिवासी अपने प्रिय को हाट-बाजार में पान, लुंगी और लांदा-सल्‍फी भेंट करते हैं।

गांवों में भरने वाले हाट-बाजार और मंडई-मेले युवाओं के लिए मौज-मस्ती लेकर आते हैं। यह मंडई जनवरी के पहले सप्ताह से शुरू होती है और रामनवमी तक चलती है। इसी मेले-मंडई में एक-दूसरे को देखते और अपने प्यार का इजहार करते हैं। इनके प्रेम प्रकट करने के तरीके भी अलग होते हैं।

पारंपरिक उपहार देते हैं भेंट

आदिवासी गुलाब के फूल और महंगे उपहार की जगह अपने प्रेमी को बीड़ा पान, नेरोम की लड़ी, लकड़ी की बनी कंघी और लुंगी भेंट करते हैं। इतना ही नहीं अपने प्रेमी को रिझाने झूले पर झुलाया जाता है और उनके माता-पिता को भी बीड़ी, सेल्‍फी और लांदा पिलाया जाता है। इसके लिए युवक-युवतियां बकायदा तुंबा में लांदा और एक मुर्गा लेकर आते हैं।

परिजन तय करते हैं रिश्ता

मड़ई में दोस्ती होने के बाद युवक अपनी मित्र को अपने रिश्तेदार या दोस्त के घर पर छोड़ देता है। फिर लड़के और लड़की के परिजन दोनों की शादी तय कर देते हैं। विवाह का सारा खर्च लड़केवाले ही उठाते हैं। इसके बाद आदिवासी परंपरा के अनुसार दोनों का विवाह कर दिया जाता है।

मुआवजा देना पड़ता है

शादी तय होने के बाद, लड़की वाले, लड़केवालों से मुआवजा मांगते हैं। चूंकि लड़का, घरवालों को बिना बताए लड़की को अपने परिजन या दोस्तों के यहां रख देता है, इसलिए लड़केवालों को मुआवजा देना पड़ता है। मुआवजे में धान, चावल या पूरे गांव को भोज कराने का सामान हो सकता है। आधुनिक युग में कहीं-कहीं पर नगद राशि भी मांगी जाती है।

बदल रहे उपहार

शिक्षित और शहरी सभ्यता के करीब आ रहे ग्रामीणों की सोच और उपहार देने की परंपराओं में बदलाव देखा जा रहा है। जिला मुख्यालय और कस्बाई क्षेत्र के ग्रामीण युवा अब पारंपरिक वस्तुओं की जगह आधुनिक उपहार देने लगे हैं। अब वे पान की जगह मिठाई और श्रृंगार के फैंसी आइटम देने लगे हैं। युवक जहां अब रंगीन साड़ियां, सलवार सूट तो युवतियां चश्मा-टोपी के साथ टी-शर्ट व जींस पैंट भेंट करने लग

source www.naidunia.com

 

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