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बॉलीवुड- भारत है सहिष्णु राष्ट्र, कुछ लोगों ने देश को बदनाम करने की कोशिश: मार्च फॉर इंडिया

देश में बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ लेखकों और कलाकारों के प्रदर्शन के जवाब में बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने आज राष्ट्रपति भवन तक एक मार्च का नेतृत्व किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अवार्ड वापसी अभियान स्थिति की गलत तस्वीर पेश कर देश को बदनाम करने की कोशिश है।
बॉलीवुड- भारत है सहिष्णु राष्ट्र
अभिनेता ने कहा हम लोगों ने कई लेखकों, कलाकारों और फिल्म निर्माताओं के साथ बैठक की और उनका भी मानना है कि देश में किसी तरह की असहनशीलता का माहौल नहीं है, ये मार्च बहुत से लोगों की ओर से सांकेतिक तौर पर है जो ये मानते हैं कि भारत एक है और यहां किसी प्रकार की असहिष्णुता नहीं है।

बॉलीवुड- भारत है सहिष्णु राष्ट्र, कुछ लोगों ने देश को बदनाम करने की कोशिश: मार्च फॉर इंडिया
बॉलीवुड- भारत है सहिष्णु राष्ट्र, कुछ लोगों ने देश को बदनाम करने की कोशिश: मार्च फॉर इंडिया
मधुर भंडारकर, अशोक पंडित, प्रियदर्शन, मनोज जोशी, अभिजीत भट्टाचार्य और लेखक मधु किश्वर समेत कई फिल्म निर्माताओं और कलाकारों ने रवीना टंडन समेत 40 से अधिक हस्तियों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन को सौंपने के लिए मार्च में हिस्सा लिया।

नेशनल अवार्ड से सम्मानित भंडारकर ने आरोप लगाया कि जो लोग असहिष्णुता को लेकर विरोध कर रहे हैं, उन लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुने जाने से पहले उनका विरोध किया था, जो उनकी मंशा पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा जिस तरह से समूचे प्रकरण को पेश किया जा रहा है और उसका जो संदेश देश से बाहर जा रहा है, वह गलत है। यह विविधताओं का देश है और निश्चित तौर पर कुछ घटनाएं हुई हैं लेकिन हम सभी उन घटनाओं की निंदा करते हैं। इस बारे में दो राय नहीं है।

खेर ने कहा कि वे किसी संगठन या राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े हैं। उन्होंने कहा यह मार्च भारतीयों की अगुवाई में भारतीयों के लिए किया गया। फिल्म निर्माता प्रियदर्शन ने अवार्ड लौटाने को बचकाना कहा। प्रियदर्शन ने कहा जो लोग अवार्ड लौटा रहे हैं, वे बचकाना काम कर रहे हैं। उनको कलम की शक्ति का इस्तेमाल करना चाहिए। असहिष्णुता की घटनाएं हमेशा हुई हैं। यह कुछ ऐसा नहीं है जो कल ही हुआ हो। शाहरुख खान ने कभी नहीं कहा कि वह पुरस्कार लौटा रहे हैं। उन्होंने कहा वे लोग सम्मानीय हैं लेकिन स्कूली बच्चों की तरह हरकत कर रहे हैं। वह हालांकि शाहरुख की आलोचना करने वालों से असहमत दिखे। शाहरुख ने कहा था कि देश में असहिष्णुता चरम पर है।

बढ़ती असहिष्णुता का कई लेखक, इतिहासकार, वैज्ञानिक और फिल्म निर्माता विरोध कर रहे हैं और कम-से-कम 75 लोगों ने अपने पुरस्कार वापस किये हैं। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विरोध को कृत्रिम आक्रोश और राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया।
भारत बहुत सहिष्णु राष्ट्र है। कुछ लोगों ने बढ़ती असहिष्णुता शब्दावली इजाद की है। उनकी संख्या बहुत कम है। सभी भारतीय उस तरह से नहीं सोचते हैं। हम लोग धर्मनिरपेक्ष हैं। हम लोग छदम धर्मनिरपेक्षता, चयनित आक्रोश या चयनित संरक्षण में यकीन नहीं करते हैं।
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